Learn vedic astrology through astrology course online

May 2021

Webinar 2

Play Video

free astrology course online - doubt clearing live session on May 09, 2021

🍀 Hello Namaskar Good Morning and welcome to the second doubt clearing session of just about free Astrology course online, a  fundamental course on Indian Vedic Astrology by astrologer Aman Deep Saini. Please confirm if you are able to hear me, and also that my video is also perfectly coming over to you.

Today, we have a huge list of queries to address, and I believe that today’s session will definitely overshoot the time limit that we have set for today’s session. Good Morning! Raj Kumar ji. Nice to see you here. You are making a very good progress, as far as learning Systems approach to astrology is concerned.

We have more than three hundred students in India, enrolled in this course by now and they are really learning very fast. Some of them have already got the certificate of completion. Some of them have also got the certificate of excellence. That’s a good thing. People have started learning, and they have started analyzing the horoscopes. That’s a wonderful thing that is happening. That’s actually the objective of creating this course, so that people can analyze their horoscopes themselves, check the horoscopes of their friends and families, do not be dependent on others to get such kind of guidance.

Before I start today’s session, first of all, let’s congratulate the students who have got the certifications. This is a congratulations message to all of them. Mr. Ram Nath Baitha from Bihar. He was the first to clear the assignment. Mr. Rajesh Alva from Mangalore. Deepthi Jain from Bangalore. Nilesh Jamdade from Pune. All these students have got the certificate of excellence. They have cleared the assignment with excellent scores.

I encourage everyone to learn the concepts faster. Clear all your doubts either through this channel, or with the help of one to one messages, that you continuously send to me. Like the last session, this session also we will try to conduct both in Hindi and English mix language, so that everyone can get benefited.

Let’s start with the queries. Let me share my screen, and confirm if my screen is visible. Then we will go ahead. आज के session के लिए already बहुत सारे सवाल हमारे पास आये हुए हैं। Ramnath Baitha जी ने अपने कुछ सवाल भेजे हैं। Deepak जी has sent. Deepti Jain. Lateef is also learning well, since he joined our almost free Astrology course online. Lateef! Are you online? Please confirm. रामनाथ जी पूछते हैं:

मानव जीवन कहते हैं, पूर्व जन्मों के कर्मों का नतीजा होता है। इसे systems approach में कैसे देखा जा सकता है? क्या इसके प्रभाव को ज्योतिषीय उपाय से ठीक किया जा सकता है? यदि हाँ – तो कैसे? यदि नहीं, तो किस प्रकार के दोष दूर किये जा सकते हैं – बिलकुल सही बात, रामनाथ जी। पिछले कर्मों का नतीजा, यानी कि हमारे कर्म फल हम इस जनम में भुगतते हैं। यही हमें हमारी Hindu mythology सिखाती है, जो कि सही भी है। जो भी आज हमारे actions होते हैं, उन का reaction हमें immediately भी मिलता है, कुछ actions का reaction हमें कुछ समय के बाद मिलता है। तो पूर्व जन्मों के हमारे कर्मों का नतीजा जो हम भुगतते हैं, इसी basis पर हमारा पूरा Astrological System defined है।

हमारा horoscope basically यह depict करता है, कि हमारे पिछले कर्म कैसे थे। जो हम systems approach में अभी सीखते हैं, इस course में हम सीख रहे हैं, कि यह ग्रह की strength है, किसी ग्रह की weakness है, जो यह दर्शाती है कि हमारा कौन सा area of life favorable है, progress करेगा, कौन से एरिया में हम थोड़ा सा lack करेंगे, या हमें challenges आएंगे।

In other words, chart में कहाँ पर affliction है, कहाँ पर strength है – हम सबसे पहले यह identify करते हैं।  तो जहाँ affliction है, for example हम कहते हैं कि राहु केतु ने afflict किया हुआ है। That means कि हमारी कुंडली में पितृदोष है। कहीं न कहीं, किसी न किसी जनम में हमारे से हमारे पितरों का कुछ बुरा हुआ है। अब हमें उस का हर्जाना भुगतना पड़ेगा, in terms of any area of life, जो हम analyze करते हैं।

Similarly, अगर बृहस्पति (Jupiter) कहीं पर unfavorable है, that means कि कहीं न कहीं किसी जनम में हमारे से गुरु दोष हुआ है जिस का हर्जाना हमें  अब भुगतना   पड़ेगा। So that is why we recommend कि आप गुरु की पूजा कीजिये। बृहस्पतिवार के, गुरु के सारे उपाय हम recommend करते हैं। कहीं पर अगर Sun की affliction है, यानी सूर्य की affliction है, that means कि father से related कोई न कोई problem किसी जनम में रही है। तो जितनी ज्यादा हम father की सेवा कर पाएंगे, उतने हमारे सूर्य के उपाय अच्छे हो पाएंगे।

हमारा चार्ट straight away हमारा कर्मफल हमें दर्शाता है, जिसका अगर हम proper analysis कर पाएं। और systems approach एक बहुत अच्छा system है, जो straight away हमें दर्शाता है, कि कहाँ affliction है, क्या strength है। यह सारे rules अभी आप सीख रहे हैं। और यह बहुत ही सटीक system है। मैं पिछले बीस सालों से इस system को follow कर रहा हूँ और भगवान की दया से, गुरु जी के आशीर्वाद से हज़ारों clients हैं। अभी तक बहुत ही अच्छे results मुझे मिले हैं। तो यह system अपने आप में बहुत अच्छा system है।

तो रामनाथ जी, यह जो आप का सवाल था कि पूर्व जन्मों के कर्मों का फल जो अभी हम भुगत रहे हैं, उसको कैसे ठीक कर सकते हैं, बहुत ही अच्छा सवाल था। Point यह है कि खाली आप ने किसी को remedies recommend करीं, या आप ने remedies करीं, तो straight away हमें उस के अच्छे फल मिलेंगे। इसके साथ ही साथ हमें अपना conduct भी ठीक रखना बहुत ज़रूरी है। हमारे सोच विचार भी ठीक रखने बहुत ज़रूरी हैं। एक तरफ तो हम उपाय करें, और दूसरी तरफ हमारा conduct ठीक न हों, तब भी कोई result नहीं आएगा।

पिछले जन्मों को ठीक करने के लिए तो अब उपाय कर रहे हैं, और अभी भी अगर हम अपने कर्म ख़राब ही रखेंगे, तो कहाँ से हम अच्छा result expect करेंगे? तो काफी हद तक इस question को हम ने cover किया है। Still if you have any more queries, please get back to me. Let me immediately have a look at the comment box, if there is anything.

At, we have tried to charge our students the minimum possible for our basic courses, offering them online astrology courses at rock bottom prices. That gives everyone across the globe a chance to enroll for our almost free Astrology course online keeping it extremely light on your pockets.

How should we decide the second significator – Rajkumar ji, I will come back to this question. Pleas park it for the time being.

जन्मांग ग्रहों के प्रभाव ही transit और दशा के समय मिलते हैं, या कुछ नया भी हो जाता है – देखिये रामनाथ जी, यहाँ पर एक चीज़ applicable होती है कि जन्मांग ग्रह यानि कि जन्म कुंडली के जो ग्रह हैं, वह हमें हमारे कर्मफल दिखा रहे हैं। हम Chart को decode कर के समझने की कोशिश करते हैं कि हमारा कौन सा area of the life challenging situation में है। साथ ही, हम किस तरह किसी situation पर react कर रहे हैं। यानी कि हमारी free will (एक master key जो हम ले कर आये थे) उस को हम कैसे apply कर रहे हैं। कोई और divine intervention साथ में काम कर रही है कि नहीं? That means कि हम ने कोई उपाय करने start किये और और उस की intervention साथ में आयी।

तो naturally कहीं न कहीं तो फर्क पड़ता है। कुछ नया भी हो जाता है? बिलकुल हो जाता है, depending on your sincerity towards the remedial measures that you follow. किस श्रद्धा से आप अपनी remedies करते हैं और कितनी regularity से उन को करते हैं। कितनी divine intervention और हमारी उन चीज़ों में आती है। Chart तो जन्म के समय का है। उस के बाद कितनी interventions हमने उस में ली हैं, कितनी बार हम ने remedies की हैं, वो naturally उस impact को change करती है।

वृष राशि में राहु उच्च के होते हैं। यदि यह लग्न में हो, तो जातक पर इसका क्या प्रभाव होगा जब कि उच्च के केतु सातवें में होगा – बिल्कुल ठीक बात है, लेकिन उस से पहले यह देखना होगा कि जो राहु केतु लग्न में और सातवें में बैठे हैं, उन का MEP से difference कितना है। Rahu and Ketu are generally considered as malefic planets in systems approach. वो हमेशा बुराई करते हैं क्योंकि North Pole और South Pole में जो negative energies हैं, उन्हीं hidden points को यह नाम दिया गया है North Node and South Node को। जितनी भी negativity है, वो अपने अंदर ले कर बैठे हैं। अब वह अच्छा फल तभी दे पाएंगे जब वह chart में कहीं भी affliction न दे रहे हों। जब हम कहते हैं कि वह affliction न दे रहे हों, that means कि न तो वह किसी house को afflict करें। That means कि वह MEP से दूर हों। और न वो किसी planet को (हम यहाँ Natal Chart की बात कर रहे हैं) भी afflict न कर रहे हों।

अगर किसी horoscope में ऐसा है कि राहु केतु MEP से दूर हैं, और Natal Chart के किसी भी Planet को afflict नहीं कर रहे, तब वह अच्छा फल दे सकते हैं। अब आप ने बोला की लग्न में राहु है। अगर वो लग्न में है, तो person को बहुत ज्यादा बनाएगा। अगर वो MEP के नजदीक हो गया तो फिर वो आदमी society के norms को भी भूल जाएगा। कुछ भी गलत कर के अपना फायदा करने का सोचेगा। उस की mentality manipulative होगी। MEP से दूर है, तो यह traits थोड़े कम होंगे, but ambitious वो ज़रूर होगा। और क्योंकि केतु सातवें में है, MEP से अगर नजदीक हो गया है तो naturally marital life पर उस का impact होगा। सातवें में बैठ कर वो ग्यारहवें को देखेगा तो income पर उस का impact होगा। तीसरे को देखेगा तो initiatives और ventures और communication पर उस का impact होगा। MEP से दूर हुआ, तो वो impact होंगे, पर कम होंगे। केतु generally negative impact देता है।

कोरोना एक वैश्विक महामारी बन गया है। अनेक ज्योतिषियों ने इस पर बहुत सारी ज्योतिषीय भविष्यवाणी की है। अपने पाठकों के लिए अपना विचार भी दें – देखिये! जहाँ पर एक बड़े समुदाय की बात आती है, वहां पर हम basically Mundane Astrology की बात कर रहे होते हैं। कि overall पूरे world पर या पूरी society पर या पूरे state पर या country पर जो impact है, वह Mundane Astrology के तहत cover किया जाता है, जिसको हमने इस course में अभी discuss नहीं किया है। But still आपने जो question पूछा है, अगर Corona के बारे में हम बात करें, तो depend करता है कि किस system के through और कैसे analyze कर रहे हैं। अगर इस detail में हम जाएंगे तो point बहुत debatable हो जाता है। क्योंकि सब ने इस पर  अपने अपने reviews ज़रूर दिए हैं।

और सच्चाई तो जैसे जैसे events unfold होते हैं, वैसे वैसे हमारे सामने आती है। पर इस को देखने का सब से सटीक तरीका यह है कि हम जिस जगह पर रह रहे हैं यानि कि हम सब लोग जिस country में रह रहे हैं, उस country का एक chart है, जिस को analyze कर के कुछ events को हम कुछ level तक , कुछ हद तक identify कर सकते हैं। इस के लिए India independence chart को review करने की कोशिश करते हैं। उस से पहले जरा comments को देख लें, कि क्या कोई questions आये हैं।

So everyone is in sync. Everyone is understanding the answers to these queries raised in today’s doubt clearing session of pretty near free Astrology course online. So let me quickly open the India independence chart. India independence chart is the one that we need to follow. That would give the correct picture to this specific query. This is what we have for India independence chart. 15th August, 1947 12 A.M. Delhi, the time when India got independence. तो यह वृष लग्न की कुंडली है, India की।

और इस कुंडली के हिसाब से अभी चंद्रमा में शनि की दशा चल रही है। अब इस में देखने की सबसे बड़ी बात यह है कि हम जो महामारी की बात कर रहे हैं, इतनी hospitalizations जो हो रही हैं, इतने group में, इतने बड़े level पर जो लोग hospitals में जा रहे हैं, 12th house की हम primarily बात कर रहे हैं। And 12th lord is Mars, which is मंगल placed exactly at the MEP of the 2nd house. तो लोगों की hospitalization होने की वजह से जो second house (is the house of status) already country का status भी दांव पर लगा हुआ है। Transit में अभी Jupiter भी 5 degree के आस पास चल रहा है और थोड़े दिनों में यह stationary भी हो जाएगा।

एक point तो यह कि आने वाला समय भी कोई बहुत अच्छा नहीं है। क्योंकि अगर हम Ephemeris में जा कर degrees check करें, 27 मई के आस पास 7° का बृहस्पति होने वाला है। और तब से ले कर वो करीब mid June तक stationary position रखेगा। हम May end की बात करें जब बृहस्पति 7 degree का होगा, तो 7° का बृहस्पति जब अपना पांचवा (5th) aspect 2nd house पर देगा तो Natal के मंगल को exactly afflict कर रहा होगा। तो यह May end से ले कर Mid June का भी time कोई बहुत अच्छा नहीं है। अगर उस के बाद भी हम देखें तो जो Rahu to Saturn की affliction transit में चल रही है, यह अभी 3° away है। पीछे जब यह 1° के आस पास थे तो naturally हमारे cases बहुत ज्यादा बढ़ गए थे। यही situation July में दोबारा पैदा होने वाली है।

जुलाई का भी transit एक बार study कर लें। राहु 15° के आस पास होगा, और शनि वापिस retrograde motion में 16°, (1° difference) पर आ जाएगा। Transit में जब शनि के ऊपर राहु का इतना major impact है और इस समय India independence chart में शनि की अंतर्दशा चल रही है। जब 1degree orbit में  पहले उसने इतना नुकसान किया तो हम 3rd wave की बात सुन रहे हैं, most probably वह जुलाई के महीने में पड़ने वाली है। जहाँ पर यह इससे भी तेजी से impact करेगा, क्योंकि उस समय मंगल भी Jupiter से afflict हो रखा होगा और double affliction होगी। अब सवाल यह आता है कि जब हम यह चीजें देख पा रहे हैं, तो इन का solution क्या है? Solution mundane level पर बहुत मुश्किल है, क्योंकि सबसे पहले तो individuals को ही समझाना बहुत मुश्किल है, that Astrology and this system actually works.

This is the real challenge, I am telling you guys. बहुत लोग तो इस Almost Free Online Astrology Course को as a hobby कर रहे हैं। कुछ लोग इस में अपना career बनाना चाहते हैं, as an Astrologer. कर सकते हैं, but challenges को समझना बहुत जरूरी है। As a recorded course, इस में एक limitation थी कि एक time bound course इस को हम ने बनाना था, तो वह हमारा एक effort रहा है, पहले course में। लेकिन आगे आने वाले courses में हम advanced level में जाएंगे, या हम live classes conduct करेंगे।

Professional astrologers को कहाँ challenges आते हैं? क्योकि मैं already 20 साल से इस field में काम कर रहा हूँ, तो मुझे मालूम है कि कहाँ क्या challenge आता है। यह एक challenge होता है कि किसी ने आपसे कोई query पूछी, आपने उस का answer किया। अब वो आपका advice follow करते हैं कि नहीं करते हैं, it is totally on them. तो individual level पर जब इतना बड़ा challenge है कि कोई advice ले कर के follow ही नहीं करता, mundane level पर किस किस को recommend करेंगे और कौन follow करेगा। So that is why, I generally avoid Mundane astrology.

But having said that, we know that this is the kind of situation we have in front of us. हमारे सामने ये situation आने वाली है। At least, हम तो अपना safeguard कर सकते हैं। अपने chart के according हम अपनी remedies continuously perform कर सकते हैं। अब India chart हमें यह depict कर रहा है तो कौन उस की remedies करेगा? सरकार तो इन चीजों में विश्वास करेगी नहीं। कौन अपनी बात वहां तक पहुंचाए? इतना effort कौन डाले? यह एक सबसे बड़ा challenge हमारे सामने आता है, especially जब हम mundane astrology की बात करते हैं। बैठा जी के सवाल की अगर बात करें कि कोरोना वैश्विक महामारी है। तो ठीक है, situation हमारे सामने है। हमें अपना safeguard रखना बहुत ज़रूरी है। Situation तो challenging चल रही है। आगे और भी challenging आनी है 2-3 महीने। From this horoscope, यह clearly identified है।

जो लोग कोरोना से ग्रसित हो जा रहे हैं, कहते हैं कि उन के लग्नेश पाप प्रभाव में होते हैं या कमजोर होते हैं। 6th Lord या 6th House का भी अहम role होना चाहिए – बिलकुल सही बात है। That means कि उन का ascendant भी कोई न कोई issue होता है। अगर हम health concerns की बात करेंगे, जब तक किसी के chart में ascendant lord afflict नहीं होगा, Natal chart में अगर है तो Natal affliction है। जब भी इस तरह की position आएगी, वो इंसान problem में फंसेगा। Primarily health के लिए हम ascendant और 6th House को ही consider करेंगे। 8th lord भी देखेंगे, अगर chronic disease की बात हो रही है या 8th lord 1st और 6th पर भी affliction दे रहा है।

इस समय काफी लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। और पीछे राहु केतु ने sign change किया, Jupiter ने sign change किया। Retrograde motion में वापस आये। शनि impact हुआ। तो जिन जिन के लिए Natal chart में यह planetary position impact कर रही होगी, वो इस समस्या को बहुत जल्दी face करेंगे।

अब यहाँ पर थोड़ा सा vague question इसलिए हो गया क्योंकि उन specific लोगों के DATA तो हमारे पास available नहीं हैं। हाँ ऐसे लोग जो इस problem से निकले हैं या निकल रहे हैं, या God forbid किसी की death हो गयी हो और वह data हमारे पास available है। तो यह बहुत बड़ा research का विषय है कि वो data compile किया जाए। फिर analyze कर के उस में से ढूंढ कर देखा जाए कि common points किधर हैं। यह अपने आप में एक अच्छी और बड़ी research activity है।

तो अगर आप या कोई भी students इस तरीके के लोगों के संपर्क में हैं, जहां लोगों की कोरोना से कोई problem चल रही है। कुछ cases मेरे पास भी आये हैं। अभी recently भी एक case study आयी थी। तो हम उस data को compile कर के, उन charts को analyze कर के, एक session में इसी specific point को discuss कर सकते हैं।

How to identify Retrograde motion of a planet – दीपक जी, जब हम horoscope cast करते हैं, generally आजकल सब software से ही बनाते है। जब भी आप chart बनाएंगे, अगर Jyotish Tools use करते हैं तो कुंडली में यहाँ पर भी लिखा होता है Otherwise, एक table (Rashi Chart) हमें ज़रूर मिलता है। वहां planet के सामने R लिखा होता है। That means कि वह retrograde motion में है। उस कुंडली में तो यह पता चल गया। दूसरा तरीका है कि जो एक Ephemeris हमारे को मिलता है, जिस को कई बार हम पत्रा भी बोल देते हैं, यहाँ पर planet की motion लिखी होती है।

For example यहाँ अगर हम Mercury को देखें, देखकर साफ पता चल रहा है कि 31 मई को Mercury retrograde motion में जाएगा। जब तक वो “R” लिखा है, that means कि वह उल्टी दिशा में चल रहा है। तो 31 मई से ले कर 23 जून तक Mercury will be retrograde. उसके बाद फिर वो direct हो जाएगा। तो यह tools हमें help करते हैं identify करने में कि planets की motion क्या है। राहु केतु के लिए उल्टा है। राहु केतु generally retrograde चलते हैं। जब वो direct होते हैं तो “D” mark कर देते हैं। So this is how you can identify.

What is the zodiac sign of a person? The ascendant sign or sign of the house of the Moon – I think यहाँ पर दीपक जी, आप राशि की बात कर रहे हैं, कि आदमी की / person की rashi कैसे identify होती है। यहाँ पर हम 3 चीजों की बात कर रहे हैं – लग्न, राशि (यानी कि हिन्दू system के हिसाब से राशि) और एक Sun Sign. Generally लोग confuse होते हैं कि अखबार में हम अपनी reading पढ़ रहे थे, किस को consider करें। अब Sun sign जो date specific है कि X date से Y date के बीच में किसी का जन्म हुआ हो तो उस की राशि यह है।

That basically is the Sun sign, which we don’t consider in the Hindu system. That is the western astrology system. In Hindu system, we consider only 2 things. 1st is the “Lagan” and 2nd is the “Rashi”. Rashi is that sign where Moon is placed at the time of birth. It is as simple as that.

जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में है, वही उस व्यक्ति की राशि मानी जाएगी। इस कुंडली की अगर हम बात करें, आज 9 मई, 11:23 पर अगर किसी बच्चे का जन्म होगा, तो उसकी राशि मीन (Pieces) राशि मानी जाएगी, क्योंकि चंद्रमा इस राशि में स्थित है। उस राशि के कौन से चरण में वो है, उस के हिसाब से उस के जनम का अक्षर निकलेगा। लेकिन लग्न वही होगा जो कुंडली में rising degree ascendant के रूप में आया। तो यह कर्क (Cancer) लग्न की कुंडली है जिसमे आदमी की राशि जो है वह मीन है। अब अगर चंद्रमा लग्न में है तो उसका लग्न और राशि दोनों same हो जाएंगे। चंद्र कुंडली का Systems Approach में कोई specific role नहीं है, जिस को हम consider नहीं करते। But राशि का अगर आप सवाल करें तो जिस sign में चन्द्रमा की placement है, उसको हम इंसान की राशि मानेंगे।


almost free Astrology course online at


Can Astrology tell the exact date of future events like marriage or death – when we say exact, that means you are trying to pinpoint a specific event to a date and the next question that would come is at what specific time of the day? That is very difficult and no one should actually venture out into that. Reason being कि आज की date में जो भी system हम follow कर रहे हैं, यह 100% हमारे पास available नहीं है। किसी समय पर रहा होगा।

क्योंकि Hindu Astrology, Hindu System were so advanced, but with time, हमारी काफी चीज़ें तो diminish हो गयीं। कुछ थोड़ी बहुत percentage बची है। सबसे बड़ी बात, कि वह सारी चीजें जितनी भी थीं, श्लोकों के रूप में, मन्त्रों के रूप में, Sanskrit text में थीं, और उन्हीं को translate कर के आज हमारे पास कुछ percentage of the system is available. और जिसने भी translate किया, उस की अपनी interpretation भी साथ में आयी। अब हम उसको follow कर के कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं।

2nd point – how accurate is time of birth of the native. Time में थोड़ा भी difference अगर हुआ, तो हमारी degrees, degrees की वजह से दशा, और specifically अगर हम pinpoint करने की बात करें, तो दशा के अंदर अन्तर्दशा, प्रत्यंतर दशा, प्राण दशा, सुखम दशा अगर 5 levels तक हम दशा को तोड़ें, तो उस में हमारे पास बहुत जयादा variation आता है। जरा सा time change होगा, तो हमारी सुखम दशा पूरी हिल जायेगी। अब pinpoint करने के लिए, date specific event को निकालने के लिए उस accuracy तक जाने की हमें ज़रुरत है। न वह time exactly available होगा, न वह system आप के पास आज की date में है। तो उस level तक accuracy में – one thing everyone has to understand, that astrologers do not have televisions. यह प्रोफेसर चौधरी की बहुत सटीक बात है। मैं हमेंशा याद रखता हूँ और बताता हूँ कि हमारे सामने कोई TV तो नहीं है, कि हम देख कर exact step by step एक इंसान को बता सकें।

एक general trend हमें पता लगता है। एक general analysis हम निकालते हैं और एक specific time frame की हम बात करते हैं। Marriageकी exact date निकालना प्रश्न chart के through फिर भी कुछ हद तक possible हो सकता है, क्योंकि वह time हमारे हाथ में होता है। That is where KP astrology rules over. वो एक अलग सिस्टम है। एक अलग तरीके से analyze करने की कोशिश उस में की जाती है। But still, उसके अंदर भी errors के chances बहुत ज्यादा होते हैं।

We should always restrict towards giving the general analysis. Date of death की अगर बात करें, I generally do not venture out into that. पहली चीज़ तो अगर आप longevity analyze कर रहे हैं, किसी के लिए, तो उस को बताने की जरूरत ही नहीं है। वह आप के पास consultation लेने के लिए आया है। Problem में हैं, distress में हैं। हमें उस का motivation level बढ़ाना है। उस को further distress नहीं करना, demotivate नहीं करना। पता लगाना अपनी जगह है, पर specific date तक जाने की जरूरत नहीं है। एक general trend हमें देना होता है।

अभी 2 दिन पहले भी मेरे पास 1 केस आया था। One of our students had sent the query as a paid consultation. अब उस में clearly indicated है, कि कहीं न कहीं longevity stress में है। Specific time period पता लग रहा है कि यह इतने 15 दिनों का period है। Specific date भी पता लग पा रही है, but हमें बताने की ज़रुरत नहीं है। We can recommend the remedies. We can recommend the Maha Mrityunjaya Mantra, कि इसका जाप किया जाए। अंत समय तो आ गया। बड़ा मुश्किल है, ऐसे में किसी को बताना कि आप की death की यह date है। नहीं करना चाहिए। Recommended ही नहीं है।

Let’s move on. Deepti ji के questions के answers हम ने group में भी दे दिए थे। So इन को quickly review कर लेंगे। Reason being आज हमारे पास almost 35 queries हैं। मुझे लगता है कि या तो हम overshoot करेंगे, या हमें एक next session करना पड़ेगा। But still, we will quickly try to go through all the questions that we have.

Is combustion of functional malefic planet good for the horoscope – Any weakness in the horoscope is not good. Combustion के case में क्या है कि अगर वो planet otherwise strong है, तो generally परेशान नहीं करेगा। Transit से कोई problem जब आ रही होगी, तब वो disturb करेगा। Functional malefics की अगर बात करें, कई बार यह भ्रम पैदा हो जाता है कि malefic planet है। अगर उस पे strength ही नहीं है, तो क्या कर लेगा? वह ज्यादा खतरनाक होगा। इस चीज़ को हमेशा ध्यान में रखिये कि functional malefic अगर weak हो गया, debilitated हो गया, नवामांश भी debilitation में चला गया, combustion आ गयी, कोई affliction उस के ऊपर आ गयी, वह और खतरनाक हो जाएगा और ज्यादा distressful situation पैदा करेगा।

Even if the functional malefic is exalted or in the Mooltrikona sign or combust, can it afflict any house or planet – Definitely YES! क्योंकि है तो वो malefic न।

What is the effect of functional malefic exalted, aspecting its own Mooltrikona sign positive or negative Functional malefic जब अपने मूलत्रिकोण sign में placed होता है, तब ही वह अच्छा माना जाता है। उसके अलावा वो कहीं भी हो, वहीं दूसरी जगह बैठ कर भी अपने घर पर aspect दे दे, तो वो खराब माना जाएगा। Simple!

लतीफ जी के questions. Very valid questions. And these may take some time. Lateef! I am very glad that you are really understanding the teachings of almost free Astrology course online well. It will definitely take more time। समय तो लगेगा देखिये system सीखने में समझने में। But एक बार आप लोग अच्छे से effort करेंगे, तो ऐसी कोई बात नहीं है कि आप analyze नहीं कर पाएं। Under exceptional cases only, Gemstones can be suggested for functional malefic planets. Lateef! Functional malefics के लिए मैंने पहले भी recommend किया है कि Gemstones के पीछे मत भागिए। Functional malefics को strength मत दीजिए। कई बार बहुत खतरनाक situation पैदा हो जाती है। अभी example की आप ने request की है।

Example से study कर के देखते हैं। आपको मैं समझाता हूँ। कोशिश करता हूँ। Malefics के लिए generally आप avoid कीजिए। Only and only functional benefics, if they are weak, you recommend Gemstones or colour therapy. जो हम exceptional cases की बात कर रहे हैं, वह situation पर depend करता है। For example, 12th lord की हम बात करते हैं। 12th lord is a malefic planet. अब 12th lord, take an example of Libra. I will show the horoscope also. In case of Libra, Mercury being the 12th lord becomes the most malefic planet. अब as per ground rule तो हम ने उस को Gemstone recommend नहीं करना।

लेकिन अगर Mercury 0° का है, या बहुत ही weakness ले कर है, तो उसकी marital life में बहुत problem आएगी। क्योंकि 12th house governs the conjugal bliss – the bed pleasures. In addition to that, 8th lord, 7th lord, या 8th house और 7th house और 2nd house, 4th house की position भी matter करेगी। 5th house की position भी matter करेगी for affairs. But 12th lord अगर इतनी weakness में है, being a malefic planet, Natal chart में कहीं affliction नहीं दे रहा।

In that particular case, we can still recommend an Emerald for that person, but वो भी temporarily होगा। Transit देख कर Astrologer को मेहनत करनी पड़ेगी। Transit देख कर बताना पड़ेगा – इस date से इस date तक पहन लीजिये, इस date से इस date तक उतार लीजिये। अब कोई इतनी diligently, इतनी मेहनत करने के बाद recommend कर सकता है, तब तो वो चीज़ एक बार फिर भी काम कर जाएगी। Otherwise कोई न कोई loss उस व्यक्ति को परेशान कर देगा, या hospitalization आ जाएगी या उसके जेल जाने के योग बन जाएंगे। तो malefics के Gemstones को generally avoid किया जाता है। Systems Approach में तो हम कभी भी recommend नहीं करते कि आप 6, 8, 12 के स्वामी के नग पहना दो। नुकसान होता है।

अब case study की अगर हम बात करें, यह example हम लेते हैं। हम कह रहे हैं कि राहु केतु MEP से दूर होने चाहियें। तो इस chart में अगर हम देखें 7 degree का लग्न है 25° के राहु केतु MEP से दूर हैं। Houses पर कोई affliction नहीं है। इन का aspect जहां जा रहा है, केतु पांचवी दृष्टि सूर्य पर दे रहा है। सूर्य का orb of influence 1° है। तो 5° दूर हो गया। सूर्य पर उसकी कोई affliction नहीं है। राहु के पांचवे aspect के सामने कोई planet नहीं है, नौवें के सामने कोई planet नहीं है। 25° के साथ राहु के साथ कोई planet बैठा नहीं है। केतु की नौवीं दृष्टि पर कोई planet बैठा नहीं है। तो इस chart में राहु केतु न ही किसी house को affliction दे रहे हैं, न ही किसी planet को।

So all those conditions are now matched. But राहु केतु 6th और 12th में हैं। तो placement की वजह से हम कहेंगे कि राहु केतु weak हैं। तो क्या हम इन के नग पहना दें? अगर यह सवाल आप का आता है। अब इस case में issue क्या होगा? अगर हम transit को analyze करें, आज की date में (यह जन्म है 06 Dec 1989 का) राहु केतु 16° के हैं, चन्द्रमा 26° है। एक साल पीछे का transit हम check कर लें। राहु केतु 5° के थे। Natal में Mercury 4.57° का है (Almost 5° का ही है)। तो transit केतु at that time (1 year back) was afflicting Mercury.

अब अगर केतु का आपने Gemstone, क्योंकि Natal Chart में हम ने बोला कि न तो MEP affliction है, न कोई planet afflicted है। केतु छठे में है, तो केतु का नग पहना देते हैं। लेकिन उस transit situation पर हम ने ध्यान नहीं दिया। और नग उस ने पहना हुआ था। जब transit में यह केतु 5° का हो कर Natal के Mercury को afflict करेगा, जो कि 2nd lord और पांचवें में बैठा है। Family life, wealth, profession, सारी चीज़ों में उस को problem face करनी पड़ेगी। तो transit का इतना impact आता है। Natal में तो affliction नहीं है, लेकिन transit में है।

Transit में कब आ गयी, हर planet का transit movement, हर client के लिए, आप एक साथ कितना analyze कर पाएंगे, यह एक सबसे बड़ा सवाल है।  मैं अगर आज की date में अपना database देखूं, हज़ारों clients हैं। बैठ कर हम कितनों का analyze कर पाएंगे? It is very tough. और हम ने किसी को एक recommendation दी। उस से किसी का नुकसान हो गया। तो हम ने 10 साल में जो अच्छा काम किया, वो सारा बेकार हो जाएगा। नहीं करना चाहिए। मेरी बार बार यही recommendation है कि malefics के Gemstones please मत recommend कीजिए।

As per Satva, we cannot recommend Gemstone for Saturn, it being the functional malefic. But traditional Vedic astrologers do suggest it. From practical point of view, will blue sapphire create problems for this ascendant – Similar question again? It is their problem. If they do not understand the implications, we can’t do anything about it. I am not sure, which ascendant are you talking about. लेकिन शनि के malefic होने की बात कर रहे हैं। तो मीन लग्न के लिए malefic होगा, Taurus के लिए होगा, Cancer के लिए होगा। 3 लग्न हैं, जहां पर शनि malefic होगा। Blue Sapphire recommend नहीं करना चाहिए।

Do we require to see MEP of every horoscope first? Suppose Moon is MMP for an ascendant, but it is away from MEP by more than 5 degrees. Please make clear with example. Do we need to see MEP difference for all functional malefic planets – YES. सब से पहले MEP check कीजिए, और बाकी planets की placement check कीजिये। Suppose Moon is the most malefic planet. Let’s take an example of Leo. Moon is the 12th lord. लतीफ़, इसमें example की जरूरत नहीं है। यह बड़ा simple है कि अगर लग्न 10° का है, चन्द्रमा 25° का है। 15° दूर है। कहीं भी बैठा हो, किसी भी house में हो, MEP affliction नहीं दे रहा। लग्न 10° का है, चन्द्रमा 10° की range के आस पास, 10 ± 5 कहीं भी situated है, किसी भी हाउस में। उस house पर और aspected house पर affliction देगा। Simple. As per our close to free Astrology course online, you don’t have to complicate it.

A resident of India settles in the U.S. where his health issue automatically gets okay. Does transit of a person become different in a different country – NO. जन्म स्थान कहाँ था, for example Delhi का जन्म है। दिल्ली में पला बढ़ा है। दिल्ली का longitude ले कर उसका chart बना है। Transit का impact तो यहीं से analyze करेंगे। Foreign country में जा कर health improvement हुई है, आपने example दिया। 6th house ascendant और 12th house की हम बात कर रहे हैं। Foreign settlement, यानी कि 12th house की signification. That means कि 12th house कहीं न कहीं strength में था। Foreign settlement हुआ।

Health improve हो गयी। यहां से एक simple चीज़ समझ में आयी, 12th house पर affliction नहीं है। Transit का impact तो हम उसके Natal chart की Natal location से ही check करेंगे। अब क्योंकि वो साहब एक अलग country में बैठे हैं, तो उस case में, कोई भी specific question को हम ने further cross-check करना है, validate करना है।

तो हम उस के हिसाब से प्रश्न chart बना कर check करेंगे। यह एक advanced concept है, कि उसका Natal chart तो fix हो गया, उसको तो हम change नहीं कर सकते। जो भी placement उसके Natal Chart पर हो रही है, वो उस पर impact जरूर करेगी, वह दुनिया में कहीं भी हो। लेकिन वह कोई specific event करना चाहते हैं, अपना कोई venture launch करना चाहते हैं, कहीं पर admission ले रहे हैं, कोई मुहूर्त देख रहे हैं, या उनकी कोई specific query है (for that matter, any query), तो जिस location पर अब हैं, वहां के longitudes check कर के वहां के timing से प्रश्न chart बना कर हम उस को further validate करेंगे। इसको हम Cross-verification बोलेंगे।   

What is the relevance of metals for Gemstones, for example Copper for Red pearl and Silver for Emerald – यह एक set formula है, set procedure है, जो course में हम ने बताया है कि आप अगर किसी को Yellow sapphire recommend कर रहे हैं, जैसे आपने red pearl पूछा, I think you meant Red coral here. तो उस case में generally हम gold recommend करते हैं। कभी जैसे पन्ने की बात आती है, या Blue sapphire की बात आती है, तो Gold और Silver दोनों चलते हैं। And then it all depends on the budget of the native, कि वह उस में कितना पैसा invest कर सकते हैं।

nearly free astrology course online

ठन्डे और गर्म stone का भी relevance आता है, जैसे कि Ruby गर्म है, वह Gold में जाएगा। मोती है – अब classical में वह 100 तरह के example use करेंगे, कि मोती भी Gold में recommend कर देते हैं। But there is a set procedure that we have defined in the course. तो आप उस को follow कीजिये। And you start recommending accordingly. Totally free Astrology course online will never provide and guide you with so much in depth information that is a must, if you want to become a master of reading horoscopes.

Most authors on Vedic astrology write that Yellow sapphire should be worn in right hand index finger and few gems in left hand. To what extent is it justified in context of today’s Vedic Astrology – देखिये right hand or left hand doesn’t matter at all. Generally, Males के लिए Right hand, Females के लिए Left hand recommended है। पर कई बार clash of the fingers भी होता है। पन्ना recommend किया, मोती recommend किया। दोनों सबसे छोटी उंगली में जाने हैं। या तो एक उंगली के लिए combined अंगूठी बताइए, या एक right में कीजिये, एक left में कीजिये। इसमें कोई ऐसी लंबी चौड़ी कहानी नहीं है कि एक ही हाथ में पहन सकते हैं, दूसरे में नहीं पहन सकते।

Gemology, Gem therapy, Color therapy, fingers, इन का एक specific set rule है, इस के पीछे एक scientific reason है, जो किसी समय मैं जरूर कोशिश करूंगा कि cover किया जाए। पर अभी के लिए तो यह समझ कर चलिए कि जो finger है, वह important है। कौन सी finger में कौन सा stone जाना है।  हम ने already discuss किया, metal का set formula है। अगर client rings में नहीं पहन सकता, कोई issue है, तो pendant बना कर गले में डाला जा सकता है। In conjunction with our just about free Astrology course online lessons, Combined pendant एक specific metal में भी बन सकता है।

Most often, a native says that he was born between 08:00 a.m. and 08:30 p.m. Or he says he was born between 08:00 a.m. and 09:00 a.m. How to compromise with time of birth in such case. Is there any general rule for this issue – 08:00 a.m. and 08:30 p.m.? It is more than 12 hours difference. Sir chart ठीक नहीं बनेगा। Even if you meant 08:00 a.m. and 08:30 a.m., आधे घंटे का difference भी अगर मान कर चलें, तो किसी ना किसी case में हमारी rising degree change हो जायेगी, अगर उस आधे घंटे की range में लग्न change हो रहा होगा तो तो लग्न भी change हो जाएगा।

तो time की accuracy तो बहुत ज़्यादा ज़रूरी है। There is no compromise with time. Simple rule है लतीफ़, time of birth की accuracy सारा कुछ define करेगी आप की reading को, आप की accuracy को, आप की prediction को। अगर time ही proper नहीं है, तो आपकी सारी reading गलत हो जायेगी। And then people will say Astrology does not work. This person does not know anything about astrology.

अब starting point तो वहीं से है, जो सामने से client आपके पास ले कर आ रहा है। वो ही अगर गलत हो गया, उस में हमारी तो कोई गलती नहीं है। हमारी गलती तब है जब हम ने system को समझने की कोशिश नहीं की। हम ने पूरी knowledge लिए बिना consultation देनी start कर दी, वहां पर हम गलत हैं। हम अपनी तरफ से पूरा effort लगाएंगे। System को समझेंगे, significations को समझेंगे, rules को समझेंगे, उन को properly apply करने की कोशिश करेंगे।

Client को कोई भी suggestion देने से पहले हम अपने end पर 1000s of horoscopes analyze कर के system को समझेंगे, उस के बाद हम market में as an astrologer venture out करेंगे, तो हमारी readings गलत नहीं होंगी। Still one condition remains there, कि time of birth की accuracy क्या है। अब जहां पर ऐसा case आ जाता है कि मेरा जन्म 08:00 से 08:30 के बीच में हैं, या 09:00 से 09:15 के बीच में हैं, मुझे नहीं पता। Then in that case, we have to do BTR (Birth Time Rectification).

Depending upon the specific 4 or 5 or 10 past events of the life, हमें उस time duration के बीच में multiple horoscopes बनाने पड़ेंगे। कहीं पर अगर लग्न (check spellings) change हो रहा है, तो naturally पहले तो ascendant ही fix करना पड़ेगा, for example Taurus ascendant है कि Gemini है, Leo है कि Virgo है।

Ascendant fix करने के बाद rising degree क्योंकि accordingly, दशाएं change होंगी। तो वह events कौन से chart के साथ कहाँ match करते हैं। It is a very tedious activity. And accordingly after that, we get the accurate horoscope of the person, which gives us the correct answers. तो यह advanced concepts में चला जाता है। बहुत tedious activity है। Practice के साथ आएगी। Unless you have the basic understanding and analyze one Natal chart, we can’t proceed further. तो time हमारे पास हमेशा accurate होना चाहिए।

Can we suggest the Gems therapy for a weak benefic planet, not afflicted or aspected by any malefic planet but positioned in 6th, 8th or 12th house – राजकुमार जी, अगर planet 6, 8, 12 में है, तो उसको placement की weakness तो anyways है। We should recommend the Gemstone.

Does any benefic planet, being dispositor, positioned in a bad house, overpower the significance of that house – अगर dispositor की हम बात कर रहे हैं, for example सूर्य कर्क राशि में है, that means कि Moon, the lord of Cancer, is the dispositor of Sun. तो उस house को, जहां पर सूर्य बैठा है, rule तो चन्द्रमा ही कर रहा है। अब उसकी जो strength है, naturally उस house को तो primarily impact करेगी. Sun वहाँ placed है, तो वो placement से अपना impact करेगा। लेकिन उस house को govern कौन कर रहा है?

The defaulter of Sun, which is Moon. So answer to your question is – Yes, dispositor will overpower. The planet placed in a particular sign will not go beyond the strength of its dispositor. This is the principle that we follow in our as good as free Astrology course online here.

As said in case of exceptional cases, if Rahu or Ketu are giving good results, then is it necessary to advice propitiating remedies – Definitely YES. क्योंकि transit affliction तो कभी भी देंगे, Sir. उसके chart को हम कितना analyze करेंगे? किसी इंसान ने एक बार आ कर आपको अपना चार्ट दिखाया, अगले 6 महीने या एक साल तक वो दोबारा आएगा नहीं आपके पास। आपने तो अपने हिसाब से एक recommendation दे कर उसको भेजना है। पूरे साल वो क्या करेगा?

हमने तो अपना काम पूरा करना है, वह follow करे न करे। अब according to astrosatvacourses, which is a nearly free Astrology course online principles, Natal chart में placement ठीक है। Same वही example आ गया, जो लतीफ के question में हम ने discuss किया था। लेकिन transit में वो कब affliction दे देगा? या तो हम बैठ कर 6 महीने, साल, डेढ़ साल, 2 साल, 5 साल, सारा transit analyze करें।

इतना time and energy spend करना बड़ा मुश्किल होता है, especially when the number of cases are flowing in hundreds. बड़ा मुश्किल है। एक general reading देनी बहुत ज़रूरी है। Specifically, malefics के लिए remedies recommend कर देनी चाहियें, क्योकि Natal chart में अगर affliction नहीं भी है, transit में कोई planet उन की affliction में निकल गया?

Especially अगर fast moving planet है। Moon, Mercury, Venus fast moving हैं। कहीं न कहीं transit में राहु केतु के चपेट में आ गए, तो affliction जरूर देंगे। राहु केतु से उन weak planets पर affliction आएगी। तो उन की remedies कोई continuously भी perform करता है, that is very good.

During the lectures it has been mentioned that for foreign travels, we see the houses 7th, 9th and 12th houses, but in some examples, even 10th and 11th houses are also seen – Yes, because 10th house is the house of profession. 11th house is the house of gain. Sometimes, the person has to go to foreign land with respect to his profession. Official assignment के लिए जाना पड़ रहा है। तो भी 10th house का भी 12th से कोई connection (10th lord and 12th) है, 10th lord का 9th house से कोई connection है, तब भी उस case में profession के लिए foreign travel के chances बनते हैं।  

It has also been mentioned that if Rahu is close to MEP, then it can also take the native to a foreign country and in fact, help in getting the P. R. – Yes. राहु का impact foreign houses के साथ जहां होगा सातवें, आठवें, नौवें बारहवें के साथ, तो foreign जाने के chances, foreign settlement के chances बनते हैं, Rahu being the significator of materialistic pursuits. आदमी को ambition देता है। और जिस भी house में राहु की placement होती है, वहां की significations को expand करता है। हम end result की बात नहीं कर रहे हैं, but initially, expand तो करता है।

Is this workable in all the cases or it works in only a few cases – The significations that we talk about they can manifest in variety of ways. This we have said a couple of times. कि वो जो भी significations हैं, multiple significations हैं, किसी भी house की, not necessary कि अगर हम 12th house की बात कर रहे हैं तो उसका foreign settlement ही होगा।

Depending on the other configurations, हमें देखना बहुत जरूरी है। सिर्फ एक parameter के basis पर, कि बारहवें घर का planet 10th में है तो foreign settlement होगी ही होगी, ऐसा conclusion निकालना गलत होगा, जोगिंदर जी। Not necessary. Ascendant की configuration, बाकी houses की configuration, we have to see the horoscope in totality. और वो, थोड़े समय के साथ आप कर पाएंगे, definitely कर पाएंगे।

बाकी houses की significations ज़रूर matter करती हैं। अब अगर foreign settlement के लिए हम ने 12th house का example लिया, 12th house is also the house of hospitalization. अगर ascendant और 6th house की position strong नहीं है, तो घर से दूर जाना है, यानि की हम foreign land की बात कर रहे थे। लेकिन अगर छठे और पहले का significator भी problem में है और 12th house की transit affliction आ गयी, आदमी hospital में पहुंचेगा, foreign land नहीं जाएगा।

It has also been mentioned that for secret love affairs, we see the connection between house number 5 and 8. In some cases, it also involves the seventh house of marriage – Yes. Because the 7th house is the house of partners. 5th house is the house of love affairs (emotions). 8th house is the house of secret activity. इस के साथ 7th भी क्यों, 12th भी अगर हम involve कर लें, the house of bed pleasures, यह सारी significations extra marital relations, pre-marital relations, more than one partner, यह सारी चीजें इन्ही houses से clearly indicated होती हैं। Moreover, वहां पर impact of Rahu, or a Rahu like planet, that is the most malefic planet, 8th or 12th lord, उन का impact बहुत ज्यादा होता है।

Regarding the eating habits of native, whether he is vegetarian or non-vegetarian or having drinking habits or not – Drinking habit की अगर बात करें, that means alcoholism or any type of intoxication. Primarily, the role of Rahu and Rahu like planets again will be there, and their impact especially on the second house, because second house is the house of mouth. Ascendant, person’s own self, person’s temperament, person’s habits, they are seen from the first and second house. और वहां पर अगर 12th lord का, या most malefic का impact आ गया, तो वह इस तरीके के traits देता है।

What about the horoscope of twins in Systems Approach – See twins की अगर बात आएगी, तो naturally time – difference होगा। 5 मिनट, 6 मिनट, 4 मिनट, 10 मिनट, कुछ तो time difference होगा। Depending on that time difference, rising degree will change. Planets की placement same रहेगी। किसी किसी case में ascendant change हो सकता है, किसी किसी case में ascendant same रह सकता है। लेकिन rising degree change होगी। Moon की degrees slightly change होंगी, minute wise. और जब Moon की degrees change होंगी तो पूरी dasha table change हो जायेगी।

And these minor changes will make a whole lot of difference in the life of the natives. We have to check this with the help of examples. तो जहां twins के examples होंगे, वहाँ हम इस चीज़ को स्टडी कर सकते हैं। And it is very easy to identify with the help of virtually free Astrology course online Systems Approach principles.

Regarding the weight of stones and in which finger they are to be worn – हम ने finger को तो course में cover किया हुआ है। Weight भी cover किया है। Depending on the level of weakness of the benefic planet, and depending on the level of affliction coming to that planet. Minimum that we must recommend is, 4.76 Carats. कम से कम सवा पांच रत्ती। Carat में बताएं तो, 4.76 Carats is the minimum. रत्ती में बताएं तो, 5.25 रत्ती is the minimum.

We can go for higher weight of stone depending on the level of weakness and the level of affliction. For example अगर कोई planet सिर्फ placement की वजह से weak है, सवा पांच रत्ती काम कर देगा। Placement की वजह से weak है, debilitated है, नवामांश में debilitated है, plus affliction आ रही है। Multiple weaknesses और afflictions हैं।

तो weight बढ़ाना पड़ेगा। कितना बढ़ाना पड़ेगा? That comes with experience. सबसे बड़ी बात है budget. अगर एक ऐसा stone बृहस्पति के लिए recommend कर रहे हैं, Yellow Sapphire. Original Gemstone की बात कर रहे हैं। It will go in thousands. आगे अगर उस में 1 रत्ती भी बढ़ा दिया, तो price variation बहुत ज्यादा हो जाएगा। हमारा काम है recommend करना। Person has to decide what sort of gemstone he wants. तो एक nominal range – अब 5.25 को बढ़ाना है तो आप उस को 6.25, या 6.50 तक ले कर जा सकते हो। 7.25 तक भी। उस से ऊपर वह जो भी afford कर सके। But minimum is 5.25 रत्ती।

Nilesh: Mentioned below is my short interpretation of astrological remedies. Would like to confirm if below mentioned points are correct:

Remedies to strengthen need to be performed only for benefic planets. No strengthening to be performed for malefic planets in any case – Yes correct. That’s what we discussed in starting of the session today.

Malefic planets can only be appeased by performing propitiatory measures to decrease their effect – Very Good. That’s what has to be done. Astro remedies are two way astral remedies. One is to strengthen the weak (favourable) planets, and propitiate the malefics to bring down their negative impact. So two way astral remedies are recommended while we teach all but free Astrology course online. This is correct, Nilesh.

What will be the effect if propitiatory measures are also performed for benefic planets in addition to remedies? Will it affect the native positively – They can be done. It is totally optional. It is totally up to the person. But actually, there is no need. If you do charity, no one said that charity will give any bad effect? Charities से कभी नुकसान हुआ है? पहला challenge यही होता है नीलेश, कि हम जो remedies recommend करते हैं, वही इंसान कर के राजी नहीं है। Malefics की तो करे, at least. Benefics की अगर साथ में add करना चाहते है, कर सकते हैं, कर सकते हैं, तो ज़रूर करें। कोई नुकसान नहीं है।

better than free online astrology courses

Since performance of astrological remedies require a strong Jupiter or strong 9th house lord placement, can we suggest default remedies to strengthen Jupiter (unless Jupiter has a malefic influence and considering compatibility of Gemstone) in addition to other remedies as required by the horoscope to improve the performance of remedies – Again, number of remedies बढ़ाने से कुछ फायदा नहीं होगा, but हां! Jupiter की strength के ऊपर हम ने काफी बार यह देखा है कि अगर Jupiter ही strength में नहीं है, तो इंसान advice follow ही नहीं करता। उस का religious bent of mind होता नहीं है। इन चीजों में यकीन नहीं करता। अपने को लोगों से ऊपर समझता है, तो वह कहाँ मानेगा आपकी बात?

For that matter, अगर इंसान को wisdom चाहिए, तो Jupiter की strength most important है। We can recommend, provided Jupiter is not malefic. अगर malefic नहीं है, तो Jupiter को strength दे सकते हैं। But we have to also see that बाकी जहां पर strength देनी required है, वहाँ वो हो पा रहा है कि नहीं हो पा रहा है। अगर दशा lord Jupiter नहीं है, ascendant lord कोई दूसरा planet है, उन के लिए 2 Gemstones आप already recommend कर रहे हैं। तो फिर Jupiter के लिए अगर हलकी फुलकी strength ही देनी है तो या तो substitutes के लिए चले जाएँ, या फिर simple color therapy को use करें।

Aspects and conjunction: 5 degree (5°)

Confirmation required if following steps and understanding mentioned is correct order to determine strong affliction

  1. Identify MEP – YES
  2. Identify planets in 5° of MEP – YES
  3. Identify planets falling under aspects of these planets within 5° of MEP identified in step b) (same house/ any other in the horoscope) – 5° range में जब देखेंगे तो यह देखना होगा कि जिस planet पर impact है, उसका orb of influence कितना है? वो otherwise कितना strength में है। अगर Rahu का impact सूर्य पर जा रहा है और सूर्य otherwise strong है, तो orb of influence 1° है। राहु के साथ साथ शनि का भी impact आ गया, जो कि शनि unfavourable था, तो orb of affliction 2° है। अगर वो non- mooltrikona sign में है, या planet otherwise weak है, तो 5° है। तो वह तीनों principles भी आप को साथ में consider करने पड़ेंगे।
  4. For weak benefics falling under the aspect of malefics within 5° of MEP, house of weak benefics will be strongly afflicted throughout ±5°. If the lord / significator of the afflicted is strong, then affliction will not be that strong – MEP का concept अलग है, नीलेश, aspect of 5° अलग है। House of weak benefics will be strongly afflicted throughout ±5° – this is more or less, correct. If the house is afflicted, then its lord cannot be strong. उस पर affliction तो आ रही है, तो एक weakness तो वहीं पर है। Otherwise strong की बात करें। If we say, the lord or the significator of the afflicted house is otherwise strong, but having the affliction, then affliction will not be that strong – YES! Your understanding is correct in accordance with the principles of as good as free Astrology course online,
  5. If lord/ significator of the afflicted house is also weak, affliction will be strong – YES! वह otherwise भी weak है। अगर मान लीजिए, सूर्य की बात कर रहे हैं, सूर्य एक उच्च राशि में, यानि कि Aries में placed है, नवामांश में भी strong है, degree wise strong है, कोई और affliction नहीं है, लेकिन Leo पर उस के मूलत्रिकोण sign पर कोई affliction है। तो वह mild affliction पर हैं। Otherwise, strong Sun. लेकिन जहां पर सूर्य बैठा है, या तो वहाँ पर affliction हो, सूर्य पर directly  कोई affliction हो, या सूर्य debilitated sign में हो, या सूर्य नवामांश में भी debilitated हो। So Sun will be otherwise weak also. उस case में अगर Leo sign पर affliction है, then that will be considered as strong affliction.
  6. For empty houses falling under aspects of malefics within 5° of MEP, strength of Lord/ Significator of that house needs to be determined to estimate the level of affliction – YES. उस case में नीलेश, अगर वो non-mooltrikona house है, MT house के case में घर में  कोई planet नहीं बैठा। पर साथ ही यह देखना होगा कि वहां पर MT sign, यानी कि मूलत्रिकोण sign है, या नहीं है। अगर MT sign है, तो dispositor को भी देखना पड़ेगा। और अगर non मूलत्रिकोण sign है, तो straight away 5° का rule applicable होगा।

Criteria for combustion by Sun – Any planet that is coming near to Sun gets combust, and by what degree of level, that is covered in the course. So just follow that table. उस case में aspect काम नहीं आता। सिर्फ और सिर्फ हम conjunction की बात करते हैं। Conjunction, not necessarily कि उस house में हो रही हो। अगर planet एक घर पीछे भी है, लेकिन उस का longitudinal difference from Sun is coming within that range that is specified in the table, then that planet is considered as combust. और combustion की weakness कोई बहुत बड़ी weakness नहीं है।

Natal chart में अगर combust है, कोई बात नहीं। उस की weakness combustion की problem तभी करेगी, जब transit से उस planet पर कोई affliction आएगी। Otherwise, वो planet की significations in general, bother नहीं करेंगी। उस combust planet की दशा भी लग जाए, अगर वो planet otherwise strong है, तो अपनी significations को flourish करेगा। सिर्फ और सिर्फ जब वो planet transit affliction में (Natal to transit या transit to natal) जब problem में आएगा, जब तक वो transit problem है, तब वो specifically उसकी significations उतने  time duration के लिए, परेशान करेंगी।

Do we need to strengthen planets in Sun-like houses (2, 3, 9), if they are weak in degree/ afflicted by a strong malefic or their placement in these houses itself strengthens these planets – Planet placed in the Sun-like house gains additional strength. But otherwise also, if they are weak, we may have to strengthen them. इस के पीछे जो calculation है, कि manually कैसे calculate करते हैं, या planetary strength कैसे calculate की जाती है, that is covered in the advanced course. But the ground rule is, that number of afflictions and number of weaknesses आप अलग से identify कीजिये।

Even if the planet is placed in the ninth house, which is a Sun-like house, first of all, we have to see कि degree wise उस planet की strength कैसी है। Infancy या old age में तो नहीं है? Secondly, वहाँ पर मूलत्रिकोण sign placed है कि नहीं? नवामांश में और Natal chart में Planet को debilitation है कि नहीं? Combustion है कि नहीं? कोई affliction आ रही है कि नहीं? सिर्फ Sun-like houses में बैठने से उसको strength मिल रही है, वो एक factor है। But बाकी levels पर उस की weakness कितनी है? उस को measure करना बहुत important है और अगर वह बाकी levels पर weak है, तो definitely हमें उस को strengthen करने की जरूरत है। साथ ही यह देखना भी ज़रूरी है कि हम किस planet के लिए strengthening measures recommend कर रहे हैं।

अगर हम ऐसे planet के लिए strengthening measures recommend कर रहे हैं, जिसकी दशा ही अभी operation में नहीं है, या आनी नहीं है, या इंसान की जो query है, उस का उस से कोई लेना-देना नहीं है, तो क्यों एक specific Gemstone पर उस का खर्चा करवाएंगे? कौन सा Gemstone उस समय required है? किस चीज़ के लिए आप के पास analysis के लिए query आयी है? क्या उसको इस समय matter of the life concern कर रहा है, परेशान कर रहा है? या तो वह planet होगा, या दशा lord होगा।

Primarily दशा lord ही होता है, क्योंकि life में दशा से related significations ही हिलती हैं। तो as a ground rule, Dasha lord को strengthen करना होता है, या फिर ascendant lord को। Additional planets क्या strengthen करने हैं, उस category में अगर कोई planet है, तो recommend किया जा सकता है। Time frame बताया जा सकता है, कि 6 महीने बाद, 1 साल बाद, 2 साल बाद, जब इस planet की दशा आने वाली हो, तो यह Gemstone भी  recommended है। This is how you can take a decision when you are a student of practically free Astrology course online at

If you have some more queries, we can remain online for the next 10 minutes. अभी जो queries हम ने discuss की हैं, उन में से कोई चीज़ आप ने दोबारा समझनी है तो पूछ सकते हैं।

What if the Lord of 6th, 8th and 12th houses aspect their own house – if in the natal chart, 6th lord is placed in the 6th house, then it is considered good. अगर छटे का स्वामी बारहवें में बैठा है, और बारहवें से छटे को देख रहा है, तो वह कोई अच्छा combination नहीं है। उस case में वह अपने house की significations को strengthen नहीं करेगा। अगर वह छटे का lord हो कर छटे में बैठा हो, तब वह positive माना जाएगा। I think, this clears the question.

Ketu can destroy Saturn’s power if Saturn is in its own house – Yes! Milind Ji.

What does it mean to be in “own house” – Own house means, either in Capricorn, or Aquarius, the signs ruled by Saturn. When we say any planet is placed in its own house, that means, that sign is also ruled by that planet. Venus and Taurus or Libra, Jupiter in Sagittarius or Pisces is considered to be in the own house. We have to look at it that way.

What would have happened if Ketu and Saturn were both in Libra at the same degrees – If Ketu and Saturn at same degree, that means Ketu is afflicting Saturn. And if Saturn is also malefic, then Saturn is also afflicting Ketu. We have to see, which ascendant we are talking about. In Libra, Saturn is exalted. So exaltation से तो Saturn को strength मिल गयी, लेकिन केतु ने तो afflict कर दिया। वह problem करेगा। Saturn की significations के लिए – Saturn की general significations, or prime significations, wherever the Aquarius Sign is falling in place.

I believe आज के session से कुछ तो सीखें होंगे आप लोग। आगे भी कोई queries आप की हों, तो feel free to post your queries. I will try to answer them in the next doubt clearing sessions of our next to free Astrosatvacourses Online Astrology course. अभी में देखता हूँ कि group में activity थोड़ी कम है। उस level पर कम लोग queries कर रहे हैं। या तो सब कुछ अच्छे से समझ आ रहा है, या अभी course study नहीं कर रहे हैं। या कुछ समझ ही नहीं आ रहा है। तीनो में से कोई एक बात है, चौथी हो नहीं सकती। Examples, जितने ज्यादा आप शेयर कर सकें।

Advanced course, we will be launching in this month. That is an exhaustive course. जैसे हमारे Fundamental course में 15 घंटे के lectures हैं, Advanced course में 20 घंटे के lectures हैं, 28 chapters हैं, case studies उस में almost 86 हैं, 75 main case studies हैं। And then, उस में हम ने Muhurat correction भी cover किया है, Matchmaking भी cover किया है। We will let you know when that happens.

Will we get recording of this session – Yes! Parvez. For previous session also, the recording is available. This recording will also be available, uploaded on youtube. The links will be published on the website. So it will be easier for you to find all the webinars that we conduct.

How should we decide the 2nd significator of any aspect of life like marriage, children, fortune, profession, etc. – We are actually talking about house groupings. This concept, I have covered in the advanced course. For any specific life area, there are multiple houses that are responsible. For example, if we talk about children, 5th house is the prime house, if there is a mooltrikona sign. If the 5th house does not contain a mooltrikona sign, then we have to move to the 2nd house, the house of addition into the family. The entire table is available, entire set of prime houses and secondary houses, and beyond secondary houses is also available.

ऐसा हो सकता है कि 5th house में कोई मूलत्रिकोण sign नहीं था, so we move to the second house. And second house also does not have any mooltrikona sign. Then we consider the general significator of the 5th house for that specific life area. So the table of secondary significator is available additional significator that we call. The table of general significator of a house is also available. That I have covered in the advanced course. I can share it here also. You will find it in the books also. So for children, 5th and 2nd. For marriage, 7th and 2nd. For profession, 10th and 2nd. For income, 11th and 6th. So all this information is available.

I am confused in Triple Transit concept – Rajkumar ji, Triple transit will come with practice, with some time. First, try to analyze the natal chart, and the नवामांश chart, and then Triple Transit will come. Whatever are the pain areas, whatever is the weak area of any student, rather than going for the doubt clearing session, we can decide on that specific area and हम एक वही session रख लेंगे। For example, Triple transit. बैठा जी को भी शायद इस में issue आता है। उन्होंने भी एक बार मुझ को बोला था कि Triple transit में बहुत issue है।

तो हम एक specific session Triple transit के लिए रख लेंगे। या कोई भी और area जहां पर issue आता है, उस के लिए अलग से एक session रख लेंगे। और उस session में हम वो सारे concepts clear कर लेंगे। That way, we can cover a lot of details of the Systems Approach principles, and that is very important. That is really required to understand muhurat selection, matchmaking, detailed analysis, so we will do that.            

Almost all the queries were covered. If any queries with respect to the areas covered in today’s session, feel free to send queries. Thanks for joining in and making this session a success. We will conclude this session here.

Hope you liked this interactive doubt clearing session. For your more friends starting their journey of mastering astrology, they can start with a practically free Astrology course online at Click here to explore more…

Bye! Everyone

Aman Deep Saini